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प्रियंका गांधी का पीछा करेंगे रॉबर्ट वाड्रा के ये विवाद

प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में कूद चुकी हैं. कांग्रेस ने उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया है. लोकसभा चुनावों के मद्देनजर प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की ज़िम्मेदारी दी गई है. आम तौर पर बयानों और सभाओं से किनारा रखने वाली प्रियंका गांधी, कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी हैं. प्रियंका के राजनीति में आने से एक ओर जहां कांग्रेस उत्साहित है, वहीं प्रतिद्वंदी पार्टी भाजपा को परिवारवाद और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है. पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगभग अपने सभी भाषणों में रॉबर्ट वाड्रा का जिक्र 'दामाद जी' कह कर किया करते थे और कांग्रेस परिवार पर उन्हें फायदा पहुंचाने और दामाद के जरिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते थे. अप्रैल 2014 में छत्तीसगढ़ के विश्रामपुर में एक रैली के दौरान मोदी ने "दामाद जी" का जिक्र करते हुए कहा था, "ये मां-बेटे का जादू देखो, जो एक लाख को तीन सौ करोड़ कर देते हैं." हालांकि कांग्रेस परिवार इन आरोपों को खारिज करता रहा है. वाड्रा और विवाद, दोनों साथ-साथ चलते रहे ...

टेरीज़ा मे के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव गिर गया

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के ख़िलाफ़ संसद में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है. विपक्षी लेबर पार्टी उनके ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी. 325 सांसदों ने सरकार का साथ दिया और 306 सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के बारे में यूरोपीय अधिकारियों के साथ जो समझौता किया था, उसे लेकर वो मंज़ूरी दिलवाने मंगलवार को संसद में गईं, लेकिन संसद ने उसे एक सिरे से ख़ारिज कर दिया था. उसके बाद लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बेन ने कहा था कि टेरीज़ा मे की सरकार संसद में अपना विश्वास खो चुकी है. कोर्बेन ने यही कहते हुए अविश्वास प्रस्ताव रखा था. बुधवार को ब्रितानी संसद में छह घंटों तक अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई जिसके बाद वोटिंग हुई. लेकिन टेरीज़ा मे की अपनी पार्टी के बाग़ी सांसद और डीयूपी के सांसद जिन्होंने सिर्फ़ 24 घंटे पहले टेरीज़ा मे के ब्रेक्सिट डील के विरोध में वोट किया था, बुधवार को उन सांसदों ने सरकार से समर्थन में वोट डाला. इसी वजह से टेरीज़ा मे केवल 19 वोटों के अंतर से अपनी सरकार बचाने म...

'सेक्स लिस्ट' जारी करने पर जापानी पत्रिका को मांगनी पड़ी माफ़ी

यह पत्रिका ख़ास पुरुषों के लिए है , जिसमें विश्वविद्यालयों की रैंकिंग की गई है कि कहां की महिलाओं को शराब पिलाकर यौन संबंध बनाने के लिए आसानी से तैयार किया जा सकता है. ये सूची साप्ताहिक पत्रिका स्पा में जारी की गई थी. इस सूची के जारी होने के बाद इसकी काफी आलोचना की गई. एक महिला ने तो इसके लिए एक अभियान शुरू कर दिया. महिला की मांग थी कि पत्रिका इस तरह की सूची प्रकाशित करने के लिए माफ़ी मांगे और पत्रिका से इस लेख को हटाए. लेख में ग्यारानोमी नाम की पार्टी का ज़िक्र किया गया है, जो एक ड्रिंकिंग पार्टी है. इस पार्टी का हिस्सा बनने के लिए मर्द औरतों को पैसे देते हैं. 25 दिसम्बर के अंक में कहा गया है कि ये पार्टी कॉलेज छात्राओं के बीच बेहद लोकप्रिय है. और इस लेख में एक ऐसे सॉफ्टवेयर डेवलपर का इंटरव्यू भी शामिल किया गया है, जिसने ऐसा ऐप बनाया है जिसकी मदद से मर्दों और औरतों को पार्टी में बुलाने के लिए सही लोग मिलेंगे. पत्रिका ने एक बयान में कहा, "महिलाओं के साथ कैसे यौन संबंध बनाने वाले लेख पर हम पाठकों से माफ़ी मांगते हैं, हमें खेद है कि इस लेख में पाठको को लुभाने के लिए आप...

यमन में भूखों के मुंह से खाना छीन रहे हैं विद्रोही

राजनीति में भी कई ऐसे पल आए जिनके बारे में भविष्य में ज़िक्र होता रहेगा. कुछ ऐसे पल कैमरे में भी क़ैद हुए. पेश हैं राजनीति से जुड़ी कुछ ऐसी ही चुनिंदा तस्वीरें. ऊपर दिख रही पहली तस्वीर कर्नाटक में कांग्रेस की गठबंधन सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के मौक़े पर ली गई थी. ये तस्वीर इसलिए ख़ास बन गई क्योंकि इसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बीएसपी प्रमुख मायावती काफ़ी करीब नज़र आ रही हैं. तस्वीर में राहुल गांधी भी हैं. जो दोनों महिलाओं के स्नेह को देखकर ख़ुश हो रहे हैं. इस साल जुलाई में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान संसद में एक लंबा भाषण दिया और अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगा लिया. ये तस्वीर उस वक़्त ख़ूब वायरल हुई थी. ये साल कांग्रेस के लिए काफ़ी अहम रहा. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधान सभा चुनावों में कांग्रेस की सरकार बनी. राजस्थान में सरकार तो बन गई, लेकिन फिर पेंच मुख्यमंत्री पद के उम्मीवार पर जा फंसा. रेस में दो नाम थे. दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट. आख़िरकार का...

ट्रंप ने इराक़ पहुंचकर दी सैनिकों को क्रिसमस की बधाई

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने क्रिसमस के मौके पर इराक़ में मौजूद अमरीकी सैनिकों से मुलाक़ात की. ट्रंप पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के बिना इराक़ पहुंचे. उनके साथ अमरीका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप भी थीं. व्हाइट हाउस ने जानकारी दी है कि ट्रंप और मेलानिया 'क्रिसमस को देर रात' इराक़ पहुंचे. वो इराक़ में मौजूद सैनिकों को 'उनकी सेवाओं, उनकी कामयाबी और उनकी कुर्बानियों' के लिए शुक्रिया अदा करने गए थे. समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमरीका की इराक़ से सैनिकों को हटाने की कोई योजना नहीं है. ट्रंप का इराक़ दौरा उस वक़्त हुआ जब मध्य पूर्व की रणनीति पर मतभेद को लेकर कुछ दिन पहले ही अमरीकी रक्षा मंत्री जिम मै टिस ने इस्तीफ़ा देने का एलान किया था. राष्ट्रपति के साथ सेल्फी वो सैनिकों के साथ करीब तीन घंटे तक रुके. जब ट्रंप डाइनिंग हॉल में दाखिल हुए सैनिकों ने उन्हें खड़े होकर सम्मान दिया. ट्रंप ने सभी सैनिकों को शुभकामनाएं दी और उन्हें ऑटोग्राफ दिए . सैनिकों ने राष्ट्रपति के साथ सेल्फी भी लीं. ट्रंप की योजना फ्लोरिडा स्थित अपने...

विराट कोहली हैं घमंडी और ख़राब रवैया वाले खिलाड़ी: नसीरुद्दीन शाह

हिन्दी सिनेमा में सार्थक फ़िल्मों से पहचान बनाने वाले नसीरुद्दीन शाह अमूमन फ़िल्मों के अलावा दूसरे मुद्दों पर चुप ही रहते हैं लेकिन सोमवार को उन्होंने फ़ेसबुक पर अपनी एक पोस्ट में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को निशाने पर लिया है. शाह ने अपनी पोस्ट में लिखा है, ''विराट कोहली न केवल एक बेहतरीन बल्लेबाज़ हैं बल्कि दुनिया के सबसे ख़राब व्यवहार वाले भी खिलाड़ी हैं . क्रिकेट की प्रतिभा के अलावा उनके पास घमंड और ख़राब व्यवहार भी है. और हां, मेरा देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है.'' नसीरुद्दीन ने इसके अलावा अमरीकी ऐक्टिविस्ट चेल्सिया मैनिंग के एक कथन को भी फ़ेसबुक पर पोस्ट किया है. वो पोस्ट है, ''जो सत्ता में होते हैं उन पर सवाल खड़े किए जाते हैं तो वो राष्ट्रवाद का सहारा लेते हैं.'' नसीरुद्दीन शाह की इन पोस्ट का कुछ लोगों ने समर्थन किया है लेकिन ज़्यादातर लोगों ने भला-बुरा कहा है. हाल ही में विराट कोहली ने अपने ऐप पर एक वीडियो जारी किया था जिसमें एक व्यक्ति की टिप्पणी पर उन्होंने जवाब दिया था. उस वीडियो में विराट कोहली कह रहे थे कि जिन भारती...

ज़िंदगी का कोई बड़ा फ़ैसला लेना हो, तो कब लिया जाए?

हम जब कोई बड़ा फ़ैसला लेते हैं, तो नफ़ा-नुक़सान तोलते हैं. आंकड़ों की मदद से ख़ुद को उसके लिए तैयार करते हैं. कई बार एक झटके में भी फ़ैसले ले डालते हैं. बहुत से लोग साल के आख़िरी महीने तक फ़ैसला टालते हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी होते हैं जो नए साल का इंतज़ार करते हैं, फ़ैसला लेने के लिए. हममें से बहुत से लोग सर्दियों में थोड़ा खिंचे-खिंचे से रहते हैं. मूड ख़राब रहता है. कई लोगों को तो सर्दियों में एसएडी की बीमारी यानी सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर हो जाता है. ख़ास तौर से उत्तरी गोलार्ध में रहने वालों को. अमरीका में क़रीब दस फ़ीसद आबादी इस मर्ज़ की शिकार है. स्विटज़रलैंड में बीस साल तक चले तजुर्बे में पता चला कि वहां की 7.5 प्रतिशत आबादी एसएडी की शिकार है. और सीज़नल मूड ख़राब होने का ये सिलसिला लंबा भी खिंच सकता है. इस मर्ज़ का शिकार औसत अमरीकी, साल के 40 फ़ीसद टाइम सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर की चपेट में रहता है. 1980 के दशक में टेलीफ़ोन से अमरीका में एक सर्वे किया गया था. जाड़े के दिनों में 92 प्रतिशत लोग एसएडी के शिकार पाए गए. अब आपका मूड ख़राब है, तो ज़ाहिर है इसका असर आपके फ़ैसला ल...